हो गया है मुझे प्यार - 1

Discussion in 'Hindi Sex Stories - हिंदी सेक्स कहानियाँ' started by SexStories, Sep 9, 2017.

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    हो गया है मुझे प्यार - 1

    Ho gaya hai mujhe pyar- 1:

    हेल्लो दोस्तों आप की माँ की चूत | मुझसे मुह मत लगाना नहीं तो मैय्या चोद दूंगा एक एक की | मैंने सच में नहीं सोचा था मैं इतना गन्दा लड़का बन जाऊँगा पर मेरे बहनचोद दोस्त हैं ना उनकी वजह से मैं ऐसा बन गया और गाली देने लग गया | मैंने अपनी पढाई एक बहुत बड़े कॉलेज से की है पर झांट कुछ नहीं आता | मैं नौकरी भी एक बहुत बड़ी कंपनी में करता हूँ पर झांट कुछ नहीं बनता | मुझे सब फ्री में मिला है और मेरे बाप की पहुँच से | लड़कियां मुझे अपने टैलेंट से मिलती हैं क्यूंकि मैं अच्छा दिखता हूँ और मेरे पास पैसा भी अच्छा है | इसलिए मैं हमेशा लड़कियों के बीच बना रहता हूँ | कल ही की बात है मेरे दोस्त के पास भी वार है पर ऑफिस वाली माल को मेरी फेरारी में ही जाना था | अब क्या करे दोस्तों रहीसी चोदना तो अपनी पुरानी आदत है | पर मैं रहीसी वहीँ पे चोदता हूँ जहा पे मुझे लगता है ज़रूरत है नहीं तो मैं एक ज़मीन से जुदा हुआ इंसान हूँ | अब मैं कुछ कहना चाहता हूँ आपसे जो मैंने कई दिनों से अपने दिल में छुपा के रखा है |

    मैंने कई बार सोचा कि मैं कभी किसी को अपने दिल की बात बताऊँ पर कोई मिला ही नहीं | पर एक बार मैं मार्किट में खड़ा था और कपडे खरीद रहा था | तभी मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी वो भी मस्त लग रही थी मैंने सोचा इसको अपने पैसे का रौब दिखा के पटा लूँगा और फिर इसको चोदुंगा | मैं उसके बाजू में गया और सबसे महंगे कपडे खरीद लिए | मैंने सोचा इस चीज़ से वो थोडा सा पटेगी क्यूंकि मेरा बिल दो लाख हो गया था | उसने मेरे बिल की तरफ देखा भी नहीं पर जब मैंने उसका बिल सुना तो मैं सन्न रह गया | उसका बिल 5 लाख रुपये का था पर मैंने सोचा चलो ठीक है ये मेरी कार पे तो फ़िदा हो ही जाएगी | मैं नीचे गया और अपनी फेरारी के पास जाके खड़ा हो गया और उसे खोलने लगा | वो मेरे बाजू से निकली और मेरी कार को भी नहीं देखा | उसके पास लेम्बोर्गिनी थी मैंने सोचा भाई ये मेरे से भी ज्यादा रहीस की चोदी लग रही है | पर मुझे उसको पटाना ही था क्यूंकि कुछ भी हो मैं भी रहीस हूँ और मुझे वो मस्त लग रही थी |

    पर मैं तो बेवकूफी में उसकी कार का का नंबर भी देखना भूल गया क्यूंकि मुझे तो बस उसको पटाना था और चोदना था बाकि वो अपनी माँ चुदायेर मेरे बाप का क्या ? मैंने उसको बहुत ढूँढा पर वो नहीं मिली | साला लम्भोर्गिनी कार शहर म,इ किसी के पास नहीं है मैंने उसको तक पता लगाया पर वो भी नहीं मिली | उसके बाद मैंने उम्मीद ही छोड़ दी कि अब कुछ हो सकता है | फिर एक दिन पापा ने कहा बेटा तैयार होजा हमे पार्टी में चलना है | शहर के सारे रहीस यहाँ आ रहे हैं | मुझे पापा के साथ मस्ती करने में अच्छा लगता है पार्टी में जाने की बात से ही मैं बिलकुल गुमसुम हो जाता हूँ | क्यूंकि उनकी पार्टी बिलकुल शांत और बकवास रहती है | पर अब पापा मम्मी दोनों जा रहे थे तो मैंने सोचा अब खाना कौन मंगवाए बाहर से इसलिए चले ही चलो | मैं भी मस्त तैयार हो गया और निकल पड़ा उनके साथ मैं अपनी चार में और पापा अपनी रोल्स रोय्स में | ये कार लोगों को आसानी से नहीं मिलती पर हमारी बात ही अलग थी |


    हम लोग पार्टी में पहुंचे और वहाँ जाके मैंने खाने के लिए देखा और थोडा सा स्नैक्स ले लिया | मैं खा रहा था कि एक दम से मेरी नज़र उस लड़की पर पड़ी और वो भी मुझे देख रही थी | फिर वो अपने माँ बाप के साथ मेरे पापा के पास आई और उसके पापा मेरे पापा के दोस्त निकले और कहने लगे यार रवि तुम तो बड़े रहीस हो गए बताओ मुझे पीछे ही छोड़ दिया | मेरे पापा बड़े ही उदार किस्म के है और कहने लगे आरे कृष्णकांत बस मेहनत की यार | मेरे पापा ने मुझे बुलाया और कहा मिलो मेरे सबसे पुराने दोस्त से हमारी दोस्ती गाँव में हुयी थी और आज तक है | फिर उन्होंने कहा यार रवि मेरी बेटी के लिए कोई लड़का बताओ मैंने सोचा इस नकचढ़ी से कौन करेगा शादी | वो थोड़ी देर बाद आयी और उसने मेरी मम्मी और पापा के पैर छुए | मैं हैरान रह गया क्यूंकि इतने संस्कार तो मुझमे भी नहीं थे | पापा ने कहा लड़की तो हम इस नालायक के लिए भी ढूंढ रहे हैं | उन्होंने कहा वाह !!!!! बगल में छोरा शहर में ढिंढोरा | हम दोनों एक दूसरे को मुह खोल के देख रहे थे और दोनों ने एक साथ कहा.... ये !!!!!

    हमारे माँ बाप हमारे मुह देख रहे थे और हम एक दूसरे का | खेर हमे पता था हमारे माँ बाप जो चाहते हैं वही होगा फिर मैंने कहा पापा मुझे थोडा सोचने का वक़्त चाहिए | फिर पापा ने कहा चलो कृष्णकांत इनको अकेले छोड़ देते है ये लोग सोच लेंगे आधे घंटे में और चले गए | अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्यूंकि जिस लड़की को मैं चोदना चाह रहा था उसी से मेरी शादी | हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे और कुछ नहीं बोले | मैंने कहा सुनो मुझे बहुत साड़ी चीज़ें पता करनी है तुमाहरे बारे में तुम्हे अच्छे से जान जाऊ और तुम भी मुझे तब कोई जवाब देना | उसने कहा ठीक है ये लो मेरा नंबर हम बात कर सकते है और मिल भी सकते हैं अगर तुम चाहो | मैंने कहा यार मुझे आगे तक जाना है मैं नहीं चाहता मेरी जिंदगी में आके तुम्हे कोई दिक्कत हो | उसने कहा और मैं भी नहीं चाहती मेरी वजह से तुम्हे कोई प्रॉब्लम हो और हम दोनों चले गए |

    चार दिन हो गए और मैं उसे कॉल लगाने के बारे में रोज़ सोचता था पर कर नहीं पाता था | इसलिए मैंने सोचा क्यूँ न उसको मेसेज कर दिया जाए | मैंने उसको मेसेज किया और तुरंत ही उसका रिप्लाई आ गया | उसने कहा क्या हम मिल सकते हैं मैंने कहा हाँ बिलकुल बताओ कहाँ आना है | उसने कहा मेरे घर आ जाओ | मैं उसके गर गया तो वो अकेली ही थी मैंने कहा चलो यार कॉफ़ी बना के लाता हूँ तुम्हरे लिए | उसने कहा क्या बात है आते ही हक ज़माना शुरू कर दिया | मैंने कहा क्या पता इसी चीज़ से हम दोनों एक दूसरे को जान जाए | वो मेरे पास आयी और उसने मेरे कान के पीछे फूंक मारना शुरू कर दिया | ये चीज़ मुझे उत्तेजित कर रही थी और मुझे तो वैसे भी उसी को चोदना था | पर मैंने जैसे तैसे काबू किया खुद पर और उससे कहा ये क्या कर रही हो ? उसने फिर मुझे पीछे से बांहों में जकड लिया और कहने लगी क्या मैं तुम्हे अच्छी नहीं लगती | मैंने कहा यार बड़ी खूबसूरत हो संस्कारी हो और एक लड़के को इससे ज्यादा क्या चाहिए | बस बेईमानी पसंद नहीं है अगर आज मैं तुम्हरे साथ कुछ कर लूँगा तो मैं अपनी और अपने माँ बाप की नज़रों में गिर जाऊँगा | उसने मुझे फ़ौरन छोड़ दिया और कहा क्या बात है जनाब आपने तो एक बार में ही दिल को जीत लिया | मैंने कहा क्यों ऐसा क्या कर दिया मैंने ? उसने कहा मैं तो तुमको वो रहीस लड़कियों के साथ खेलने वाला समझ रही थी पर तुम तो अच्छे लड़के निकले यार | मैंने उससे कहा यार ऐसे फैसला मत करो पहले कोफ्फे पियो और मेरी बात सुनो |
    उसने कहा अच्छा ठीक है सुनाओ अपनी बात | मैंने कहा ऐसा नहीं है मेरी लाइफ में कभी कोई लड़की नहीं थी या मैंने किसी के साथ सेक्स नहीं किया ? वो अब चुप हो गयी तब मैंने कहा मेरी लाइफ में दो लड़कियां थी और उनके साथ मैंने सेक्स इसलिए किया क्यूंकि मैं नशे में था | वो चुप हो गयी और उसका चेहरा उदास हो गया | मैं उठा और कहा सच बताके मैं तुम्हे चोट पहुंचा सकता हूँ पर सच छुपा के तुम्हे पल भर की खुशियाँ नहीं दे सकता | मैंने अपनी जेब से एक चाकलेट निकाली और उसको देके कहा इसको खा लेना टेंशन कम होगा और मुझे उदास चेहरे बिलकुल पसंद नहीं खासकर उनके जिनको मैं पसंद करता हूँ | फिर काफी दिन बीत गए न तो उसका कॉल आया और ना ही मेसेज | एक दिन मैं ऑफिस से निकला और वही ऑफिस वाली लड़की मेरी कार के सामने आई और मेरी कार का दरवाज़ा खोला और बीतने लगी और मैं उसे मन करने लगा | उतने में तनूजा ने मेरी कार के सामने अपनी लेम्बोर्गिनी अड़ा दी और उस लड़की से कहा क्यों तुझे सुनाई नहीं देता वो मन कर रहा फिर भी घुसी जा रही है |

    दोस्तों बाकी की कहानी अगले भाग में सुनाऊंगा आपको मैं |

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