बॉयफ्रेंड का लंड और मेरी प्यासी चूत - चूत और लंड की सबसे रोमांटिक कहानी पढ़े - पिंकी

Discussion in 'Hindi Sex Stories - हिंदी सेक्स कहानियाँ' started by SexStories, Sep 12, 2017.

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    MyIndianSexStories

    September 12, 2017 ,,,,,,,,,,,,,
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    http://myindiansexstories.com/index.php?forums/telugu-sex-stories-తెలుగు-సెక్స్-కథలు.4/
    हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम पिंकी है और में गुवाहटी की रहने वाली हूँ। मेरे घर में मेरे मम्मी, पापा और बड़ा भाई है। मेरे मम्मी पापा दोनों ही नौकरी करते है और में घर में सबसे छोटी हूँ, इसलिए में थोड़ी सी नटखट और मेरी लम्बाई 5.3 इंच है, मेरे फिगर का आकार 34-30-34 है

    में अभी 12th क्लास में हूँ और में अपनी क्लास में सबसे सुंदर लड़की हूँ, लेकिन थोड़ी सी मोटी और अब थोड़ा सा में अपने भाई के बारे में भी बता देती हूँ, वो कॉलेज में पढ़ता है और उसका शरीर भी दिखने में अच्छा है। दोस्तों अब में अपनी आज की कहानी पर आती हूँ। दोस्तों मेरे स्कूल के पास ही एक कॉलेज था ।

    जिस कारण लड़के हमेशा हमारे आस पास ही मंडराते रहते थे और धीरे धीरे मेरी सभी दोस्तों के बॉयफ्रेंड बन गये, वैसे में भी उन लड़को की नजरो में थी और बहुत सारे लड़के मुझे भी लाईन मारते थे। शुरू शुरू में तो मैंने उनमें से किसी को भी भाव नहीं दिया, लेकिन धीरे धीरे मेरी सभी दोस्तों के जब बॉयफ्रेंड बन गये तो मेरा भी मन अब डोलने लगा था, वो सभी लड़कियाँ लंच टाईम में अपने बॉयफ्रेंड से बातें किया करती थी तो उन्हें देखकर मेरा भी बहुत मन करता था कि मेरा भी कोई बॉयफ्रेंड हो।


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    फिर एक दिन मैंने सोचा कि में भी किसी को हाँ बोल ही दूँ, तो अब में उन सब लड़को पर अच्छे से नज़र रखने लगी और वो मेरे आस पास मंडराते रहते थे, जिनमें कुछ मेरी क्लास के लड़के भी थे और कॉलेज से भी बहुत लड़के आते थे। सभी की तरह मेरे भी मन में था कि मेरा बॉयफ्रेंड सबसे स्मार्ट और एकदम मस्त हो, इसलिए मैंने स्कूल के किसी लड़के को हाँ बोलने की बजाए कॉलेज के एक लड़के को हाँ करने की बात सोची, जो रोज सुबह मेरे घर से स्कूल तक मेरा पीछा करता था।

    दोस्तों उसका नाम रिंकू था और वो मेरी एक सहेली के बॉयफ्रेंड का दोस्त था और उनसे मुझे मेरी सहेली के जरिए ही अपने मन की बात के बारे में कहा था और फिर मैंने भी अपनी सहेली के जरिए ही उससे हाँ कही और उसको हाँ करते समय दोस्तों में बहुत ही रोमांचित महसूस कर रही थी।

    दोस्तों उस समय मेरे पास फोन नहीं था, इसलिए लंच टाईम में मेरी सहेली ने ही उससे मेरी बात करवाई, पहली बार किसी लड़के से बात करते समय मुझे बहुत डर भी लग रहा था और मज़ा भी बहुत आ रहा था और जब पहली बार मेरी उससे बात हुई तो हम ज्यादा कुछ बात नहीं कर पाए, जैसे कि आप कैसे हो, घर में कौन कौन है और उसके बाद मैंने फोन अपनी सहेली को दे दिया, क्योंकि मुझे उससे बात करने में बहुत शरम महसूस हो रही थी।

    फिर उसके अगले दिन जब में स्कूल जा रही थी, तो रिंकू ने अपनी बाईक को ठीक मेरे सामने आकर रोक दिया। उसे देखकर में मुस्कुराई और फिर चुपचाप उसके पीछे बैठ गई और वो आराम से अपनी बाईक चलाने लगा और हम बातें करने लगे और बीच बीच में वो ब्रेक भी लगा देता था।


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    जिससे मेरे बूब्स उसकी पीठ पर छू जाते, इससे मेरे शरीर में करंट सा लगता और में थोड़ा संभालकर बैठने की कोशिश करती, लेकिन अगली बार जब वो ब्रेक लगाता तो में फिर से उससे चिपक जाती, जब तक हम स्कूल नहीं पहुंचे, तब तक यही सब चलता रहा और स्कूल पहुंचने से पहले उसने बाईक को एक साईड में रोक दिया और वो उतरकर अब मेरे सामने खड़ा हो गया। फिर उसने मुझे पहली बार मेरे सामने में तुमसे प्यार करता हूँ बोला।

    फिर मैंने भी उससे हाँ में भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ कहा और फिर में शरमाकर उसके पास से भागने की कोशिश करने लगी, लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी तरफ़ खींचा तो में सीधे उसकी बाहों में चली गई। फिर कुछ देर के लिए उसने मुझे हग कर लिया, जिसकी वजह से मेरे शरीर में मानो करंट सा दौड़ने लगा और वो बहुत मजबूत था।

    मैंने उसे छोड़ने को कहा तो उसने अपनी पकड़ थोड़ी ढीली कर दी, जिससे मुझे छूटने का मौका मिल गया और में उससे छूटकर आगे की तरफ़ भागी और फिर मुड़कर उसकी तरफ़ जीभ निकालकर उसको में चिढाने लगी। फिर मुझे देखकर वो मुस्कुराता रह गया और में स्कूल में आ गई। दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

    अब ऐसे हमारा रोज का मिलना हो गया, में स्कूल जाते समय और आते समय उसके साथ ही आती जाती, जिसकी वजह से अब मेरी झिझक और शरम भी दूर हो गई। अब में खुद ही उससे चिपककर बैठती, जैसे बाकी लड़कियां बैठती है, जब वो मुझे हग करता तो मुझे बहुत अच्छा लगता। अब में कभी भी उसको छोड़ने के लिए नहीं बोलती, जितनी देर उसका मन करता वो मुझे हग करता रहता और उसके बाद में स्कूल में आ जाती।

    दोस्तों इससे आगे ना कभी वो गया और ना कभी में गई, मुझे अब रिंकू पर बहुत प्यार आने लगा था। एक दिन लंच टाईम जब में रिंकू से बात कर रही थी, तो उसने मुझसे कहा कि कल हम पार्क में मिलते है। मैंने कभी स्कूल में बंक नहीं किया था और अकेले पार्क में मिलने में मुझे डर भी लग रहा था तो इसलिए मैंने उससे मना कर दिया, उसने बहुत मनाने की कोशिश की, लेकिन मुझे डर लग रहा था, इसलिए में नहीं मानी।

    फिर लंच के बाद मेरी सहेली ने मुझे बताया कि वो और उसका बॉयफ्रेंड भी कल बंक कर रहे है और में भी रिंकू के साथ चली जाऊं और उसके मनाने पर मैंने हाँ कर दिया, लेकिन मुझे अभी भी थोड़ा सा डर लग रहा था, स्कूल के बाद मैंने रिंकू को अपना डर बताया तो उसने मुझसे बोला कि एक बार चलकर देख लो वहां पर सब स्कूल कॉलेज के लड़के लड़कियां होते है और सभी बहुत मजे करते है, तुम्हें किसी बात से घबराने की ज़रूर नहीं है।

    फिर अगले दिन में अपने स्कूल के लिए निकली तो रोहन रास्ते में ही मुझे मिल गया और में चुपचाप उसके पीछे बैठ गई। उसने बाईक को सीधे कॉलेज के पास बने पार्क की तरफ़ घुमा दिया और में वहां पर पहुंची, तो मैंने देखा कि मेरी सहेली और उसका वो दोस्त पहले से ही वहां पर थे और हमे देखकर वो खुश हो गये। उसके बाद हम साथ साथ पार्क में गये और वहां पर हर तरफ़ के जोड़े ही जोड़े थे। उनको देखकर मुझे थोड़ी शरम भी आ रही थी।

    कुछ देर तो मेरी सहेली और उसका दोस्त हमारे साथ रहे, लेकिन कुछ देर बाद वो हमसे दूर होकर बैठ गये। फिर रोहन मुझे लेकर झाड़ियो के पीछे आ गया, वहां पर पहले से एक जोड़ा बैठा था, इसलिए हम उनसे थोड़ा सा दूर होकर बैठ गये और इधर उधर की बातें करने लगे। फिर कुछ देर बाद मेरी नज़र उस जोड़े पर चली गई तो में उनको देखती रह गई, क्योंकि वो दोनों स्मूच कर रहे थे और लड़के के हाथ लड़की के दोनों बूब्स पर थे।

    अब उनको देखते ही में अपनी नज़र को इधर उधर करने की कोशिश करने लगी और रिंकू ने भी मुझे उनकी तरफ़ देखते हुए देख लिया था, वो भी मेरे पास आ गया और बातें करता मुझे इधर उधर छूने लगा। मैंने भी उसे नहीं रोका, क्योंकि मुझे भी उसके छूने से अच्छा लग रहा था।

    फिर कुछ देर बाद वो बिल्कुल मेरे पास आ गया और उसने मुझे हग कर लिया। मैंने भी उसे हग कर लिया और फिर हमने स्मूच भी किया और यह मेरी पहली समूच थी और मेरे होंठो में उसके होंठ थे और वो मेरे होंठो को चूस रहा था, में भी उसके होंठो को चूसने लगी और मेरे बूब्स उसकी छाती से चिपके हुए थे और उसने मुझे बहुत टाईट हग किया हुआ था।

    कुछ देर में तो उसने मेरा बहुत बुरा हाल कर दिया था और मेरे होंठो में दर्द होने लगा था और एक दो बार उसने मेरे बूब्स पर हाथ भी रखा, लेकिन इससे ज्यादा मैंने उसको कुछ भी नहीं करने दिया, मुझे अच्छा तो बहुत लग रहा था, लेकिन डर भी लग रहा था, स्कूल की छुट्टी के समय हम घर के लिए निकल गए ।

    जिससे किसी को भी हमारे ऊपर शक ना हो और आज के बाद तो में रिंकू से बहुत खुल गई और में हर समय उसके ख्यालों में खोई रहती, पढ़ाई की तो मुझे कोई फ़िक्र नहीं थी, बस पूरा दिन रिंकू के ख्यालो में खोई रहती। अब तो हम सप्ताह में दो या तीन दिन पार्क में रहते, में रिंकू से बहुत खुल गई थी।

    जिस दिन वो मुझे पार्क में बुलाता तो उस दिन में जानबूझ कर ब्रा पहनकर नहीं जाती, जिसकी वजह से रिंकू आराम से मेरे बूब्स को देख सके और दबा सके, वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर चूसता और मुझे बहुत मज़ा आता। एक बार रिंकू और में पार्क में थे, रिंकू मेरे ऊपर लेटकर मेरे बूब्स को चूस रहा था और एक हाथ से दबा रहा था और में मज़े में डूबी हुई थी और मुझे पता ही नहीं चला कि कब उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और अपना एक हाथ मेरी पेंटी के अंदर डाल दिया। दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

    वैसे तो में कभी उसे ऐसा नहीं करने देती थी, लेकिन आज में मज़े मज़े में उसे रोक ही नहीं पाई और वो मेरी चूत से खेलने लगा। दोस्तों पहली बार मेरी चूत पर किसी मर्द का हाथ लगा था तो में बहुत गरम हो गई और उस वजह से मेरी चूत पानी छोड़ने लगी, मुझे मेरी नस नस में करंट सा दौड़ता हुआ महसूस हो रहा था, ऐसा मज़ा मुझे आज तक नहीं मिला था। अब उसने मेरी चूत में उंगली डाल दी और फिर आगे पीछे करने लगा।

    फिर कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे शरीर का पूरा खून मेरी चूत के आस पास आ गया है और मेरा एकदम से प्रेशर बन गया। मैंने रिंकू का हाथ पकड़कर उसको रोकने की कोशिश की, लेकिन में रोक नहीं पाई और मुझे ऐसा लगा कि में सलवार में ही सू-सू कर दूँगी और एकदम से फ्री हो गई, मेरे मुहं से आआहह की आवाज़ निकली और में एकदम निढाल सी होकर लेट गई। मुझे देखकर रिंकू ने पूछा क्या पहली बार था? तो मैंने कहा कि हाँ पहली बार था।

    फिर उसने मुझसे कहा कि अब तुम्हारी बारी है और उसने अपनी पेंट की चैन को खोलकर अपना लंड बाहर निकाल लिया, इससे पहले मैंने कभी लंड नहीं देखा था और में मन ही मन सोच रही थी, क्या बच्चों की नूनी इतनी बड़ी हो जाती है? मेरे देखते ही देखते रिंकू ने अपना हाथ अपने लंड पर साफ किया, जो मेरी चूत के पानी से गीला हो गया था।

    में तो एक टक होकर लंड को देख रही थी, रिंकू ने अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और लंड पर रख दिया और मैंने उसका लंड पकड़ लिया। फिर उसने ऐसे ही अपने लंड को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। में उसे देख रही थी और मेरे हाथ में उसका लंड था।

    तभी उसने मुझसे कहा कि अब तुम करती रहो, जब तक में फ्री नहीं हो जाता और फिर में उसके सामने बैठकर उसके लंड को आगे पीछे करने लगी और वो मेरे बूब्स के साथ खेलने लगा। करीब दस मिनट के बाद मेरा हाथ थकने लगा, लेकिन वो फ्री होने का नाम नहीं ले रहा था। मैंने उससे कहा कि क्या है तुम तो फ्री हो ही नहीं रहे? तो उसने मुझसे कहा कि जान एक बार मुहं में ले लो।

    अब मैंने उससे पूछा कि तुम यह क्या बोल रहे हो, अगर तुम फिर से ऐसे बोले तो में हाथ में भी नहीं पकडूँगी। तब उसने मुझसे कहा कि फिर तुम चूत में डालने दो, में थोड़ी देर में ही फ्री हो जाऊंगा। फिर मैंने कहा कि ना में ऐसे ही करती रहूंगी, तुम फालतू की मांग ना रखो, वरना में यह भी नहीं करूँगी।

    तो वो बोला अच्छा रहने दो बस पांच मिनट और फिर वो मेरे बूब्स को चूसने लगा और में उसके लंड को हिलाती रही और करीब दस मिनट के बाद उसके लंड ने एक पिचकारी छोड़ी, जो सीधा मेरे पेट गिरी में उसके लंड को छोड़ने लगी तो उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से पकड़ लिया और लंड को तेज़ तेज़ हिलाने लगा।

    फिर मैंने देखा कि उसके लंड से बहुत सारा सफेद चिकना पदार्थ निकलकर उसके और मेरे हाथ पर आ गया और वो भी थककर बैठ गया। फिर मैंने मेरे रुमाल से उसका माल साफ किया और हम घर की तरफ़ चल दिए। अब तो हम जब भी पार्क में जाते हमारा यही काम होता।

    वो अपने लंड को मेरी चूत में डालने की बहुत ज़िद करता, लेकिन में उसे अंदर नहीं डालने देती थी, लेकिन वो हाथ से ही सहलाकर मुझे शांत किया करता, वो हमेशा मुझे हाथ से करने के नुकसान बताता, वो बताता कि इससे आदमी सेक्स के काबिल नहीं रहता और उसका लंड खड़ा होना बंद हो जाता है।

    इसलिए लड़को को ऐसा नहीं करना चाहिए और हमेशा चूत में लंड को डालना चाहिए। फिर मैंने उससे वादा किया कि में गर्मियो की छुट्टियों के बाद उसे सब कुछ करने दूँगी और उसके साथ ही रहकर मैंने अच्छे से जाना कि लड़को की नज़रे हमेशा हमारे बूब्स को और गांड को घूरती रहती है, पहले में इस तरफ़ कभी ध्यान नहीं देती थी, लेकिन अब में स्कूल में भी ध्यान देती।

    जब भी कोई लड़का मुझसे बात करता है तो ज्यादातर समय उसकी नज़र मेरे बूब्स पर होती थी और अंदर ही अंदर यह सब मुझे अच्छा लगता था, इसलिए में टाईट शर्ट और स्कर्ट पहनकर स्कूल आती और मैंने सभी डिजाईन की भी फिटिंग ब्रा और वैसे ही कपड़े पहने, जिससे मेरे बूब्स और गांड एकदम मस्त दिखे, जैसा कॉलेज की लड़कियां करती है ।

    इससे मेरी सुन्दरता पर चार चाँद लग गये, लेकिन इस सबके बीच मैंने घर पर भी एक बात पर ध्यान दिया कि मेरा भाई भी जब में उसकी तरफ़ नहीं देख रही होती तो वो मेरे बूब्स को और मेरी गांड को घूरता। दोस्तों में आपको बताना भूल गई कि मेरे घर में नीचे मम्मी, पापा का बेडरूम है और गेस्ट रूम है, मेरा और भाई का रूम ऊपर है और हमारे दोनों के रूम में एक बेड लगा हुआ है और भाई के रूम में एक कंप्यूटर भी है।

    दोस्तों में जब भी अपने भाई के रूम में जाती तो कंप्यूटर के पास जमीन पर कुछ पीले रंग के दाग होते, जो मुझे हमेशा मिलते थे, लेकिन मैंने हमेशा ही उनकी तरफ इतना ध्यान नहीं दिया। दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

    अब स्कूल में गर्मियों की छुट्टियाँ होने वाली थी और स्कूल का आखरी दिन था और उस पूरा दिन में रिंकू की बाहों में रही। मेरा उससे अलग होने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था, क्योंकि मुझे पता था कि अब पूरे महीने हमारी बात नहीं हो पाएगी और ना ही हम मिल पाएँगे, इसलिए मेरी तो आँखो से आँसू आने लगे और उसने बड़ी मुश्किल से मुझे चुप करवाया और घर आते वक़्त भी में उससे चिपककर बैठी रही।

    उसके बाद में घर पर आ गई। करीब 2-3 दिन तो मेरा मन ही नहीं लगा, लेकिन फिर टी.वी. और भाई के साथ बातें करने के बाद मूड ठीक हो गया। घर पर मम्मी पापा के ऑफिस चले जाने के बाद में और भाई ही बचते, इसलिए में पूरा दिन अपने भाई के आसपास ही रहती और टी..वी. देखती या फिर सोती।

    दोस्तों दिन में ज्यादा सोने की वजह से कई बार रात को नींद नहीं आती। फिर एक दिन ऐसे ही मुझे रात को नींद नहीं आ रही थी तो मैंने सोचा भाई को देखती हूँ, वो क्या कर रहा है, अगर जगा हुआ है तो कुछ देर में उसके साथ बैठ जाउंगी। फिर मैंने दरवाजा खोलकर भाई के रूम की तरफ़ देखा तो उसके रूम की लाईट जली हुई थी, इसलिए मैंने जाकर उसके रूम का दरवाजा बजा दिया।

    फिर भाई ने करीब पांच मिनट के बाद दरवाजा खोला तो उसके रूम से अलग सी बदबू आ रही थी और यह बदबू में पहचानती थी, फ्री होने के बाद माल से ऐसी बदबू आती थी। अब भाई ने मुझसे पूछा कि क्या हुआ तो मैंने उससे कहा कि कुछ नहीं मुझे नींद आ रही थी, इसलिए मैंने सोचा कि में आपके रूम में चलती हूँ।

    फिर भाई ने कहा कि हाँ तुम अंदर आ जाओ और में अंदर आई तो सबसे पहले मेरी नज़र कंप्यूटर टेबल के पास गई, कुर्सी के नीचे कुछ गीला सा लग रहा था, जैसे अभी अभी सफाई की हो और में तुरंत समझ गई कि भाई अभी कुछ देर पहले ही फ्री हुआ है। फिर में भाई के साथ उसके बेड पर बैठ गई और इधर उधर की बातें करने लगी।



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