दादी और माँ के साथ बहन की सील तोड़ी

Discussion in 'Hindi Sex Stories - हिंदी सेक्स कहानियाँ' started by SexStories, Sep 13, 2017.

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    प्रेषक : अमन .

    हैल्लो दोस्तों, मेरी पिछली कहानी "माँ का भोसड़ा और दादी की गांड चोदी" को पड़ने के लिए धन्यवाद। दोस्तों इस कहानी में मैंने आपको बताया था कि कैसे मैंने अपनी माँ और दादी को चोदा था। अब आगे की कहानी इस प्रकार है।

    अब मेरा लंड पूरा सात इंच का हो गया था। अब में चूत के लिए बहुत तरसता था। फिर मैंने कई बार अपनी बहन की चूत को देखा था और उसको छूकर भी देखा था। एक दिन मेरी माँ और दादी को किसी शादी में जाना पड़ा, जाना तो हमें भी था, लेकिन वो शादी बहुत दूर थी और वहां जाने में तीन दिन लगे थे और हम काम नहीं छोड़ सकते थे, इसलिए मेरी माँ मेरी बहन को खाना बनाने के लिए घर छोड़कर चली गयी। फिर में सुबह उठा और अपना काम किया और नहाने जा रहा था कि मैंने सोचा कि मालिश ही करवा लूँ। फिर मैंने अपनी बहन को बुलाया और उससे कहा कि वो मेरी मालिश कर दे, तो वो तेल लेकर आ गई और कहने लगी कि भैया अब आप लेट जाओ और में उसके कहने पर तुरंत अपने कपड़े उतारकर लेट गया। में बिल्कुल नंगा था और उल्टा लेटा हुआ था, उसने मेरी पीठ पर तेल डाला और मालिश करना शुरू कर दिया। मुझे उसके कोमल हाथों से बहुत मज़ा आया। फिर में कुछ देर बाद सीधा होकर लेट गया और वो मेरा सोया हुआ लंड बड़े ध्यान से देख रही थी। फिर मैंने उससे पूछा कि तुम क्या देख रही हो? वो बोली कि भैया आपका यह तो बड़ा हो गया। में उससे बोला कि यह खुद बड़ा हो गया। तो वो बोली कि आप झूठ क्यों बोलते हो रोज माँ और दादी इसकी मालिश करती है, इसलिए यह बड़ा हो गया। मैंने उससे बोला क्या तू इसकी मालिश करेगी? वो बोली हाँ कर देती हूँ। फिर यह कहकर उसने तेल मेरे लंड पर डाला और मालिश करने लगी, जिसकी वजह से मेरा लंड तनकर खड़ा होने लगा और थोड़ी ही देर में मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया, जिसकी वजह से वो अब उसके हाथ में भी नहीं आ रहा था। में पूरा गरम हो गया और मैंने उससे कहा कि तुम भी अपने कपड़े उतार दो। फिर उसने भी अपने कपड़े उतार दिए और अब वो पूरी नंगी होकर मेरे सामने खड़ी थी। उसके छाती के छोटे छोटे उभार बहुत अच्छे लग रहे थे। फिर मैंने उसको अपने पास बुलाया और उसको नीचे एकदम चित लेटा दिया। तब मैंने उसके होंठो पर अपने होंठो को रख दिया और उसकी कोमल चूत पर अपना हाथ फेरने लगा। मैंने उसके छोटे से बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा। अब वो मुझसे बोली कि भैया यह क्या कर रहे हो मुझे बहुत गुदगुदी हो रही है? अब में और भी ज़ोर से चूसने लगा। फिर कुछ देर बाद मैंने उससे पूछा क्या तुम मेरा लंड अपने मुहं में लोगी? वो बोली नहीं, तब में उससे बोला कि माँ और दादी भी लेती है तो तू भी ले, तुझे बड़ा मज़ा आएगा और वो बोली कि हाँ ठीक है।

    अब मैंने उसको अपने ऊपर ले लिया। उसका मुहं मेरे लंड पर था और मेरा मुहं उसकी चूत पर। फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया और उसने भी मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और वो मेरे टोपे को चूसने लगी और में उसकी चूत को ज़ोर ज़ोर चाटने लगा। उसी समय मैंने उसकी चूत में अपनी एक उंगली को डाल दिया, जिसकी वजह से वो चीख उठी और मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बहुत टाइट थी। में अपनी एक उंगली को लगातार अंदर बाहर करने लगा और वो पाँच मिनट में झड़ गयी। में उसका सारा पानी पी गया और में उसके दोनों पैरों को पूरा खोलकर बीच में आकर बैठ गया। उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा, जिसकी वजह से उसके मुहं से सिसकियाँ निकल रही थी। वो बोली कि भैया आपका यह लंड अंदर कैसे जाएगा, जब एक ऊँगली ही इतनी मुश्किल से जाती है तो यह नहीं जाएगा। फिर मैंने उससे बोला कि चला जाएगा, बस तुम्हे थोड़ा सा दर्द जरुर होगा। पहली बार में ऐसा दर्द सभी को होता है, बस तुम बर्दाश्त कर लेना, उसके बाद तुम्हे मज़ा आएगा। फिर वो बोली कि हाँ ठीक है और मैंने उसकी चूत पर बहुत ज्यादा तेल लगाकर अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा और मैंने अपनी दूसरी उंगली को भी अंदर डाल दिया, तब वो हल्का सा चीख उठी, उस समय मैंने सोचा कि जब मेरा लंड इसकी चूत में जाएगा तो यह बहुत चिल्लाएगी और यह बात सोचकर मैंने उसकी सलवार को उसके मुहं में घुसेड़ दिया और अपने लंड पर तेल लगाकर मैंने उसकी चूत पर रखा और उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया और हल्का सा एक धक्का दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड तीन इंच अंदर चला गया और वो दर्द की वजह से तड़पने लगी। वो मुहं से कपड़े को निकालने लगी तो मैंने उसके हाथ पकड़ लिए फिर एक ज़ोर से झटका मारा और अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अंदर चला गया।

    उसका तो बड़ा बुरा हाल था और दर्द की वजह से वो तो बेहोश हो गयी। फिर में डर गया कि कहीं इसको कुछ हो ना जाए? मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो उसकी चूत से खून निकल रहा था। फिर मैंने सोचा कि अगर इसको आज ना चोदा तो यह कभी भी मुझे चोदने नहीं देगी। मैंने उसके दर्द की परवाह किए बिना एक बार फिर से अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा। में बहुत तेज तेज धक्के मार रहा था। फिर करीब दस मिनट के बाद वो होश में आने लगी और होश में आते ही वो छूटने का प्रयास करने लगी, लेकिन मैंने उसको पूरे ज़ोर से पकड़ रखा था वो बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी। उसकी आखों से आंसू भी आ रहे थे और वो बहुत रो रही थी, लेकिन में अपने ही मज़े में उसको चोदता रहा। फिर मैंने फिर अपना लंड बाहर निकाला और एक बार में ही पूरा अंदर डाल दिया। तो वो फिर से बेहोश हो गयी और उसको 45 मिनट तक चोदने के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके छोटे छोटे बूब्स पर अपना रस निकाल दिया। और उसके बाद में भी साइड में ढेर हो गया। फिर दस मिनट के बाद में उसको उठाकर ऐसे ही बाथरूम में ले गया जहाँ पर में उसको होश में लाया।

    अब मैंने देखा कि वो अपने पैरों पर खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। मैंने उसको साफ किया और उसके बाद खुद भी नहाकर उसको कमरे में ले गया और उसको दर्द की एक गोली खिलाई और उसकी चूत को गरम पानी का सेख देने लगा और उसके बाद मैंने उसके पूरे शरीर की मालिश की, जिसकी वजह से अब उसका दर्द कुछ कम हुआ। फिर मैंने उसको खाना बनाकर खिलाया और खुद भी खाया। उसके बाद वो सो गयी। फिर में उठा और अपना काम करने लगा काम खत्म करके में शाम 7:30 बजे उसके कमरे में गया और देखा कि वो अभी भी नंगी सो रही थी। मैंने उसको उठाया, वो उठी और मेरी तरफ देखकर हंसने लगी। फिर उसकी चूत की मालिश की उसके बाद उसको नहलाया। अब हम दोनों अब कमरे में आ गये और मैंने उससे पूछा कि क्या अब भी उसको दर्द हो रहा? तो वो बोली कि नहीं अब ठीक है, में उससे बोला तो यह ले दर्द की गोली सुबह तक बिल्कुल ठीक हो जाएगी और उसने वो खा ली। फिर उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी। में भी उसकी चूत को सहलाने लगा और उसने मेरा लंड मुहं में ले लिया और चूसने लगी, जिसकी वजह से मेरा लंड अब खड़ा होने लगा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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    फिर में उसकी चूत को चाटने लगा तो वो पूरी गरम हो गयी और बोली कि भैया अब डाल दो मेरी चूत में अपना लंड मैंने उसके दोनों पैर खोले और उसकी चूत पर तेल लगाया, अपने लंड पर भी बहुत सारा तेल लगाया। फिर उसके बाद उसकी चूत के मुहं पर अपने लंड को रखकर हल्का सा झटका मारा तो मेरा लंड चार इंच अंदर चला गया और उसको दर्द हुआ, लेकिन सुबह की तरह नहीं, में उसके बूब्स को मसलने लगा और फिर धक्का मारा तो मेरा छ: इंच लंड अंदर चला गया। अब उसको तेज दर्द होने लगा। में उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठो चूसने लगा, उसके बूब्स को मसलने लगा और वो थोड़ा सा शांत हुई तो मैंने एक धक्का दोबारा मार दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड मेरी उसकी चूत में चला गया और वो दर्द से करहाने लगी, लेकिन में उसके होंठो को चूसता रहा और उसके बूब्स को मसलता रहा। करीब पांच मिनट बाद वो अपनी कमर को नीचे से हिलाने लगी और में भी अपनी कमर को हिलाने लगा, तो उसको बड़ा मज़ा आने लगा था और अब वो मेरा पूरा लंड अपनी चूत में ले रही थी में उसको ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा। फिर कुछ देर बाद वो झड़ गयी तो मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकालकर उसके मुहं में दे दिया, जिसको वो मस्त मज़े से चाटने लगी और में उस समय एकदम चित होकर लेट गया। मैंने उसको मेरे लंड के ऊपर बैठने को कहा और वो बड़े आराम से मेरे लंड पर बैठने लगी और उसने मेरा पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया जिसके बाद वो ऊपर नीचे होने लगी और में उसके छोटे छोटे बूब्स को मसलने लगा। फिर करीब 1.30 घंटे बाद मैंने मेरा वीर्य अपनी बहन के मुहं में छोड़ दिया और इस बीच वो पांच बार झड़ चुकी थी और अपनी माँ और दादी के आने तक मैंने उसको कई बार चोदा। फिर माँ और दादी आ गई और सब पहले की तरह हो गया। ऐसे ही 6 महीने गुजर गये, लेकिन मेरे लंड को कोई चूत नहीं मिली, जिसकी वजह से में पागल होने लगा था।

    एक दिन सुबह में और माँ काम कर रहे थे, उन्होंने सिर्फ़ साड़ी पहनी हुई थी और जैसे ही वो नीचे झुकती तो उनके आधे बूब्स नंगे हो जाते और यह देख मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैंने उनके पास जाकर उनको पकड़ लिया और उनके बूब्स दबाने लगा। में उनसे बोला कि अब मुझसे सब्र नहीं होता आज तो तुम्हे चोदकर ही दम लूँगा। फिर वो बोली कि बेटा बस अब तुझे और देर नहीं होने दूँगी। आज रात को में और तेरी दादी तुझसे अपनी चूत चुदवाएगी, मैंने खुश होकर पूछा क्या सच? तो वो बोली कि हाँ और हम दोबारा काम करने लगे। फिर सारा काम खत्म होने के बाद शाम सात बजे माँ ने मुझसे कहा कि आ जा। तो में अपनी दादी के कमरे में चला गया, दादी मुझसे बोली चल अपने कपड़े उतार और वो मेरी माँ से बोली कि तू खाना बना ले, तब तक में इसकी मालिश करती हूँ। यह बात सुनकर माँ चली गयी। फिर दादी ने मेरी छाती पर तेल डाला और मालिश करने लगी। दादी मेरी मालिश करती हुई मेरे निप्पल पर ज़ोर से काटती तब मेरे मुहं से आह्ह्ह की आवाज़ निकल जाती। फिर दादी ने मेरे लंड की मालिश शुरू की इतने में माँ भी आ गयी और वो भी मेरी मालिश करने लगी। फिर तभी इतने में माँ और दादी भी नंगी हो गयी और फिर इतने में मेरी छोटी बहन भी अब उसी कमरे में अचानक से आ गयी और वो भी नंगी होकर मेरे पास आ गयी और माँ उसको नंगी देखकर चिल्लाने लगी कि तू यहाँ क्या करने आई है? मेरी बहन बोली कि जो तुम दोनों करने आए हो, तो माँ उससे बोली कि तू अभी छोटी है, मेरी बहन बोली कि अब में छोटी नहीं रही, भैया ने मेरी चूत को भी फाड़ दिया और वो माँ को अपनी चूत दिखाने लगी। फिर माँ मेरी तरफ देखकर बोली कि क्या तूने इसको भी चोद डाला? में उनको बोला कि में क्या करता? वो बोली चल अब जो हुआ सब ठीक हुआ, हम अब एक दूसरे की मालिश करने लगे और उसके बाद हम चारों बहुत अच्छी तरह से नहाए और हमने एक दूसरे के एक एक अंग को अच्छी तरह से साफ किया।

    फिर हम सभी नहाकर कमरे में चले गये और उसके बाद उन्होंने एक दूसरे की चूत को चाटी और मेरी बहन माँ की चूत चाट रही थी में दादी की चूत को चाट रहा था उसके बाद माँ मेरा लंड चूसने लगी और दादी मेरी बहन की चूत चाट रही थी। अब मेरा लंड पूरा तनकर खड़ा हो गया तो सबसे पहले दादी मेरे सामने सीधी होकर लेट गयी और मैंने उनकी चूत पर अपना लंड रखा और धक्का मारा तो मेरा पांच इंच लंड अंदर चला गया। माँ और बहन दादी के बूब्स को मसल रहे थे। तो मैंने फिर एक ज़ोर से धक्का मारा, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड उनकी चूत में चला गया। उनके मुहं से एक जोरदार चीख निकल गयी। अब में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और में उनको मज़े लेकर चोद रहा था। फिर करीब पांच मिनट में वो झड़ गयी तो माँ मेरे नीचे आई और मैंने उनकी चूत में एक झटके से अपना लंड डाल दिया। उनकी ज़ोर से चीख निकल गयी। फिर दादी ने माँ के मुहं पर अपनी चूत को रख दिया और में उनको ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा। फिर करीब सात मिनट में वो भी झड़ गयी। अब मैंने उनकी चूत से अपने लंड को बाहर निकाला तो उनकी चूत से खून भी निकाला और अब बारी मेरी बहन की आई तो मैंने उसको लेटाया और उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा।

    फिर माँ मुझसे बोली कि बेटा थोड़ा आराम से इसकी चूत अभी कोरी है, एक झटके में नहीं जाएगा। उनके मुहं से यह बात सुनते ही मैंने ज़ोर से धक्का देकर अपने लंड को अपनी बहन की चूत में डाल दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड चूत के अंदर था और बहन के मुहं से हल्की सी चीखने की आवाज बाहर निकली, यह देखकर मेरी माँ और दादी हैरान हो गये। फिर मैंने उनको बताया कि में इसको पहले भी चोद चुका हूँ। फिर उसके बाद में उसको तेज धक्के देकर चोदने लगा और वो भी कुछ देर बाद झड़ गयी। ऐसा तीन बार हुआ और वो तीन बार झड़ गई और अब में भी झड़ने वाला था। फिर वो तीनों मेरे लंड के पास अपने मुहं को आगे लेकर आ गई और मेरे लंड से एक पिचकारी निकली, जिससे उन तीनों के मुहं भर गये और उन तीनों ने एक दूसरे का मुहं भी चाटकर साफ किया और हम नंगे ही लेट गये। फिर माँ मुझे अपना दूध पिलाने लगी और उसके बाद दादी ने भी अपना दूध पिलाया और फिर दादी मेरा लंड चूसने लगी।

    फिर थोड़ी देर में मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया और दादी मेरे लंड पर बैठ गयी और ऊपर नीचे होने लगी, जिसकी वजह से दादी के दोनों बूब्स हिलने लगे और इतने में दादी झड़ गयी। फिर मेरी बहन ऊपर बैठ गई और वो भी वैसे ही ऊपर नीचे होने लगी, दादी ने अपने बूब्स को बहन के मुहं में दे दिए और माँ ने अपनी चूत को मेरे मुहं पर रख दिया और में उनकी चूत को चाटने लगा। फिर कुछ देर बाद मेरी बहन भी झड़ गयी। अब उसके हटते ही तुरंत मेरी माँ आ गई और वो भी ऊपर बैठकर ऊपर नीचे होने लगी और मेरी बहन उनके बूब्स को चूसने लगी। अब वो तीनों हर बार झड़ी, लेकिन में नहीं झड़ा और वो थककर लेट गयी। फिर मैंने दादी की गांड पर अपना लंड रखा और धक्का मार दिया मेरा तो लंड दादी की गांड में चला गया। माँ ने दादी के मुहं में कपड़ा रख दिया और दादी को पकड़ लिया, ताकि दादी छूट ना जाए।

    उसके बाद मैंने करीब बीस मिनट दादी की गांड मारी उसके बाद मैंने अपना लंड दादी की गांड से बाहर निकाल लिया और अपनी माँ के मुहं में दे दिया। तब मैंने देखा कि दादी की गांड से हल्का सा खून बाहर आ गया था और अब मैंने अपने लंड पर लगे वीर्य को माँ के मुहं में दे दिया, मेरी बहन दादी की गांड को चाटने लगी और माँ मेरे लंड को। फिर कुछ देर बाद मैंने माँ के मुहं से लंड को बाहर निकाला और माँ को घोड़ी बनने के लिए कहा और वो तुरंत घोड़ी बन गई। मैंने उनके मुहं में भी कपड़ा लगा दिया और उसके बाद पीछे आकर उनकी गांड पर अपना लंड रखा और ज़ोर से धक्का मार दिया। फिर मेरा लंड करीब पांच इंच तक उनकी गांड में चला गया, जिसकी वजह से वो तो जैसे कांप सी गयी और वो रोने भी लगी थी। अब मैंने फिर से तेज धक्का मारा और पूरा लंड उनकी गांड में चला गया फिर मैंने महसूस किया कि उनकी गांड बहुत टाइट थी। में उनकी गांड को ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा। उनको करीब दस मिनट तक चोदा और फिर मैंने उनकी गांड से अपना लंड बाहर निकाल लिया और अब में अपनी बहन के पास गया।

    फिर मैंने उसको एकदम सीधा लेटा दिया और उसकी गांड के नीचे तकिया रख दिया, जिससे उसकी गांड ऊपर हो जाए और उसके बाद मैंने पास पड़ी अपनी माँ की पेंटी को उसके मुहं में डाल दिया और अब में अपनी बहन की गांड पर अपना लंड रखकर धक्का मारने लगा। मेरा लंड अभी सिर्फ़ तीन इंच ही अंदर गया था कि वो रोने लगी और उसकी आखों से आंसू बाहर आने लगे। वो सबसे ज्यादा दर्द से छटपटाने लगी थी। फिर भी मैंने बिना कुछ सोचे उसकी गांड में ज़ोर से धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड उसकी गांड के अंदर चला गया। वो बुरी तरह दर्द से काँपने लगी, लेकिन में तब भी उसको चोदता ही रहा और करीब बीस मिनट के बाद में उसकी गांड में ही झड़ गया और फिर हम ऐसे ही सो गये। दोस्तों अब ऐसा हर रोज होने लगा था। फिर कुछ समय बाद मैंने अपनी बहन की शादी कर दी और कुछ महीने बाद मैंने भी शादी कर ली और अब मेरी बहन के दो बच्चे है एक लड़का और एक लड़की और मेरा एक बेटा है, मेरा जीजा भी मेरी माँ को दादी को और मेरी बीवी को भी चोद चुका है, लेकिन अब दादी हमारे बीच में नहीं है, बस हमारा मज़े से जीवन ऐसे ही चल रहा है। जब भी बहन आती है तो में और जीजा जी मिलकर माँ, बीवी और अपनी बहन को साथ में चोदते है और हम सभी चुदाई के बड़े मस्त मज़े लेते है ।।

    धन्यवाद .

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