चुदक्कर भाग - 3

Discussion in 'Hindi Sex Stories - हिंदी सेक्स कहानियाँ' started by SexStories, Jan 10, 2017.

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    सानिया सब चुप-चाप सुन रही थी। मैने उसके जाँघ पे अपना हाथ फ़ेरा और कहा-"अब तो खुश हो सानिया बेटी, तुम्हारे मन की ही हो गई।" वो बिना बोले बस मुस्कुरा रही थी। Hindi Sex Stories, Indian Sex Stories, Hindi Font Sex Stories, Desi Chudai Kahani, Free Hindi Audio Sex Stories, Hindi Sex Story, Gujarati sex story, chudai, wife swapping, pahela sex anubhav, hindi sex kahaniya, indian sex story, chudakkar part 3.
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    मैने कहा, "आने दो रागिनी को, आज उसकी लैंडिग स्ट्रीप स्टाईल में बना के बताउँगा। वो भी नई है, थोड़ा सीखेगी मेरे एक्स्पीरियेंस से"। वो बोली-"अब खाना बना लेते हैं, दो घन्टें में तो वो आ जायेगी"। सानिया किचेन में गई, मैं टीवी में बीजी हो गया। करीब ७.३० तक हमने डिनर कर लिया, और बैठ कर रागिनी का इंतजार करने लगे। ८.१० पे कौल-बेल बजी, तो सानिया तुरंत कुद कर दरवाजे तक पहूँच उसे खोला। मैंने देखा कि एक छरहरे बदन की थोड़ी सांवली लगभग सानिया की लम्बाई की ही लड़की सामने थी। सानिया ने उसका नाम पूछा और भीतर ले आई। मैंने रागिनी को बैठने को कहा तो वो सामने सोफ़े पे बैठ गई। सानिया अभी भी खड़े हो कर उसको घुर रही थी। रागिनी ने चटख पीले रंग का सूती सलवार सुट पहना हुआ था, जो उसके फ़िगर पे सही फ़िट था। लौन्डिया १७-१८ की थी, ३४-२६-३६। मेरी अनुभवी नजरों ने उसका माप ले लिया। मैं अपनी किस्मत पे खुद हैरान था। मेरे पास दो-दो जवान लौन्डिया थी, और दोनो २० बरस से भी कम। रागिनी तो सानिया से भी उमर में छोटी थी, सानिया ने दो साल पहले इंटर किया था जबकि रागिनी ने इसी साल किया। हाँ, उसका बदन थोड़ा सानिया से ज्यादा भरा था। पर फ़र्क सिर्फ़ उन्नीस-बीस का ही था। मैंने रागिनी से कहा-"ये सानिया है, यही साथ में रहेगी रूम में और सब देखेगी।" रागिनी ने अब एक पुरे नजर से सानिया को घूरा उपर से नीचे तक। मैंने पूछा-"डिनर करके आई हो या करोगी?" उसने कहा की नहीं वो जिस दिन बूकिंग कराती है, रात में नहीं खाती। रागिनी ने बताया कि वो सिर्फ़ शनिवार को ही सुरी से बूकिंग कराती है और यह सब वो थोड़ा मजा और थोड़ा पैसे के लिए करती है। इजी मनी, यू नो। मैंने उसको ५००० दे दिये और कहा कि ये जो सुरी से बात थी, अर फ़िर २००० उसको दिए और कहा कि ये उसका पर्सनल हैं मेरे रीक्वेस्ट को मानने के लिए। वो संतुष्ट थी, बोली, "एक बार सर मैं बाथरूम जाना चाहुँगी"। मैंने कहा-"ठीक है थोड़ा साफ़ कर लेना साबून से, आगे पीछे सब" और मैंने उसको आँख मारी, ताकि पहली बार की झिझक कम हो। मुझे उसके चेहरे से लग रहा था कि वो सही में नई थी। मैंने सानिया को उसे पानी पिलाने को कहा, और वो चली गयी। पानी पी कर रागिनी ने अपना दुप्पटा सोफ़े पे डाला और सानिया से पूछा-"बाथरूम".। करीब दस मिनट बाद वो आयी और कहा कि वो तैयार है, किस रूम में चलें? हम सब मेरे बेडरूम में आ गए, तब रागिनी ने पूछा-"मैं खुद कपड़े उतारूँ या आप दोनों में से कोई?" मैं सानिया की तरफ़ देख रहा था, कि उसका क्या मिजाज है। उसे लगा कि मैं शायद उसको कह रहा हूँ कि वो कपड़े उतारे, इसलिए वो रागिनी की तरफ़ बढ़ गई। रागिनी ने उसकी तरफ़ अपनी पीठ कर दी। जब सानिया उसके कुर्ते की जीप नीचे कर रही थी, रागिनी ने सानिया से हल्के से पूछा-"ये आपके पापा है?" सानिया सिटपिटा गई। उसे परेशानी से बचाने के लिए मैंने कहा-"नहीं सानिया मेरे दोस्त की बेटी है, अभी मेरे साथ रहेगी। उसे हीं मन था कि वो एक बार ये सब देखे।" रागिनी के मुँह से एक हल्का सा सौरी निकला। सानिया ने उसकी कुर्ते को खोलने के बाद उसकी समीज (स्लीप) भी निकल दी। रागिनी काले रंग की एक साटन ब्रा पहने थी। रागिनी की सपाट पेट देख मैं मस्त हो रहा था। चुचियाँ भी मस्त थी, एक दम ठ्स्स। १८ साल की लड़की की जैसी होनी चाहिए। मैं उसकी गदराई जवानी को घुर रहा था। सानिया ने उसके सलवार की डोरी खींची, और उसको नीचे कर दिया। उसने काले रंग की जाली-दार लेस वाली पैन्टी पहनी हुई थी। पैन्टी में से भी उसकी चुत अपने फ़ुले होने का आभास दे रही थी। सुन्दर सी लम्बी टाँगे, एक दम हल्के हल्के रोएँ थे जाँघों पे। उसके जवान बदन को मस्त निगाह से देखते हुए मैंने कहा-"अब रहने दो सानिया, तुम आराम से देखो बैठ कर, बाकि मैं कर लूँगा।" फ़िर मैंने प्यार से रागिनी को बाँहों में उठाया और बेड पे लिटा उसके ओठ चुमने शुरु किये। दो मिनट भी नहीं लगा, और रागिनी के रेस्पौंस मुझे मिलने लगे। सानिया अपने कैप्री-टी-शर्ट में पास ही चेयर पे बैठ गयी थी। मैंने रागिनी की ब्रा खोल दी, और उसके चुचियों से खेलने लगा। उसकी ठस्स चुचियाँ आजाद हो कर झुमने लगीं। एक बड़े से संतरे के आकार की थी उसकी चुची, जिस पर भूरे रंग का निप्पल मस्त लग रहा था। मैं उन्हें कभी चुमता, कभी चाटता, कभी निप्प्ल खींचता, कभी दबाता. मेरे दोनो हाथ भी कभी इधर तो कभी उधर मजा ले रहे थे। करीब दस मिनट चुम्मा-चाटी के बाद मैंने रागिनी की पैन्टी उसके कमर से खिसकाई, तो उसकी झाँटो भरी बुर के दर्शन हुए। मैंने रागिनी की झाँटों पे हाथ फ़ेरा। उसके झाँट करीब आधा-पौन इंच के थे। उसकी चुत पर मैने अपनी ऊँगली घुमाई और अंदाजा लगाया कि सही में उसकी अभी चुदाई ऐसी नहीं हुई है, जैसी आम रन्डी की हो जाती है। अभी भी वो घर का माल ही थी, सुरी ने सही कहा था। उसकी चुतड़ों का भी मैंने जायजा लिया, गोल-गोल, मुलायम गद्देदार। उन चुतड़ों को हल्के से मैंने दबाया फ़िर उनपर एक हल्की चपत लगाई। मैंने उसके चुत को सुँघा, सुभानल्लाह., क्या जवानी की खुश्बू मिली मुझे मेरे लन्ड ने एक अँगराई ली। मेरे मुँह से निकला-"बहुत मस्त चीज हो मेरी जान", उसे अब तक चुप देख मैंने कहा-"थोड़ा बात-चीत करते रहो स्वीटी, वर्ना मजा नहीं आयेगा।" उसने कहा-"ठीक है सर"। मेरे दिमाग ने मुझे उकसाया तो मैं बोला, "अब ऐसे सर-सर ना करो। मुझे तुम डार्लिंग कहो, राजा कहो, जानू कहो, ऐसा कुछ कहो", तो रागिनी बोली-"अभी ऐसा सब बोलने की आदत नहीं हुई सर, सौरी डार्लिंग", फ़िर बोली-"मैं डार्लिंग नहीं बोल पाउँगी, आप मेरे से बहुत सीनियर हैं।" मुझे मौका मिल गया, मैं तो अब रागिनी में सानिया को देख रहा था, सो मैंने कहा-"ठीक है, तो तुम मुझे अंकल तो कह सकती हो?" रागिनी मुस्कुराई-"ठीक है अंकल"। अब मैंने कहा-"रागिनी, आज मुझे अपनी झाँट बनाने दो, इसके तुम्हें मै, ५०० रु० और दुँगा। वो चुप रही तो मैंने सानिया से कहा की वो शेविंग किट और पानी ले आए। सानिया तुंरंत उठ कर चली गई। वो जब तक आई, मैंने रागिनी को बेड पे टौवेल बिछा उस पर बिठा दिया था। मैंने रागिनी को पहले पलट कर घोड़ी बनने को कहा, फ़िर पीछे से उसकी गाँड़ और चुत के आस-पास के बाल पहले कैंची से काट कर फ़िर रेजर से शेव कर दिया। बड़े प्यार से मैने उसकी झाँट बनाई थी, और सोच रहा था काश एक दिन ये साली सानिया की झाँट बनाने क मौका मिले तो मजा आए। मैंने रागिनी को अब सीधा लिटा दिया और साईड से उसकी झाँटो को कैंची से काटने लगा। चुत की फ़ाँक के ठीक उपर और चुत की होठ पे निकले बाल रेजर से साफ़ कर दिए। अंत में मैंने उसके झाँटों को दोनो तरह से छिलना शुरु किया। सीधा-उल्टा दोनो तरफ़ से रेजर चला कर मैंने उसकी झाँट दोनो साईड से छील दी, और बीच में जो जैसे था छोड़ दिया। करीब दस मिनट बाद रागिनी की बुर एक दम साफ़ हो चमक उठी थी, उसके बुर के ठीक उपर से जहाँ से लड़कियों की झाँट शुरु होती है वहाँ तक करीब आध इंच चौड़ी एक पट्टी के तरह अब झाँट बची हुई थी। नाप के हिसाब से बोलूँ तो करीब तीन इंच लम्बी और आधा इंच चौड़ी और करीब पौना-एक इंच लम्बी झाँटों से अब रागिनी की बुर की सुन्दरता बढ़ गई थी। मैं अपने कलाकारी से संतुष्ट हो कर कहा-"देख लो सानिया, यही है, लैंडिंग स्ट्रीप, दुनिया की सबसे ज्यादा मशहूर झाँट की स्टाईल" रागिनी की भी नजरें मेरे कला की दाद दे रहीं थी। मैंने कहा-"रागिनी, जाओ एक बार फ़िर से चुत धो कर आओ।" वो टौवेल में अपने कटे हुए झाँटों को ले कर बाथरूम में चली गयी। सानिया भी शेविंग किट रखने चली गयी, तो मैंने अपने कपड़े उतार दिए, और पुरी तरह से नंगा हो कर अपना लन्ड सहलाने लगा। मैं सोच रहा था कि कैसे सानिया मेरा लन्ड देखेगी।


    कहानी जारी रहेगी .

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