गाँव मे देवर से खेतों मे चुदाई

Discussion in 'Hindi Sex Stories - हिंदी सेक्स कहानियाँ' started by SexStories, Apr 27, 2016.

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    गाँव मे देवर से खेतों मे चुदाई

    Back1. गाँव मे देवर से खेतों मे चुदाई -gaav me devar se kheton me chudai - Part -1

    हेलो दोस्तो मेरा नाम पूजा है. मे पहले भी अपनी स्टोरी भेज चुकी हू आशा कराती हू की आपको मज़ा आया होगा. जिन्होने नही पढ़ी उनको बता दु. मे एक हाउसवाइफ हू. मेरी उमर 27 साल है. मेरा फिगर 34 26 32 है. मेरे पाती रवि ने कहा की चलो कुछ दिन के लिए गाँव चलते है. और हम गाँव चले गये. अब मेरे मे काफ़ी चेंज आ चुका था. मे अब काफ़ी सेक्सी बन चुकी थी. गाँव मे मेरे सास-ससुर और मेरे देवर रहते हे. मेरे देवर का नाम जीवन है. उसकी उमर लगभग 22 साल की होंगी. कलर तो काला ही था मगर खेत मे कम करने की वजह से शरीर अच्छा तगड़ा बना हुवा था. हम जब गाँव पहुचे तो घर पर सिर्फ़ मेरी सास थी. ससुर और देवर खेत मे गये हुवे थे. वैसे तो मेरे शादी को कुछ ही महीने हुवे थे सो मे किसीसे ज़्यादा परिचित नही थी. मे नयी दुल्हन होने के कारण सांस भी मेरा अच्छा ख्याल कर रही थी. उसने घर पर मुझे कुछ भी कम नही करने दिया. सो मेने उस दिन आराम ही किया.

    शाम मे ससुर और देवर भी आ गये. सब साथ मे खाना खाने बैठ गये. मेने उस दिन काले कलर की ट्रांस्पेरेंट सिल्की सारी पहनी हुवी थी. वो भी नवाल के काफ़ी नीचे. और मेरा ब्लाउस भी लो कट था. जिसमे से मेरे स्ठानो का ऊपर वाला हिस्सा साफ दिखाई देता था. मे जब जीवन को परोसने गयी तो ग़लती से मेरा सारी का पल्लू नीचे गिर गया. और मेरे स्तन उसके सामने खुले हो गये. मेने अपना पल्लू तो सावरा लेकिन देखा की जीवन मेरे स्ठानो की ही घूर रहा है. मुझे बहुत अच्छा लगा. मे पास मे ही बैठ हुवी थी. हमारी इधर उधर की बाते चल रही थी.मेने धेखा की जीवन मुझे ही घूर रहा है. मेने सोचा चलो इसके लॅंड के भी मज़े लेकर देखते है. वैसे भी घर जाने के बाद क्या पता कब एकड़ा अच्छा सा लॅंड चखने को मिले. यह अच्छा मौका है. मेने भी अपना सारी का पल्लू थोड़ा सा नीचे सरका दिया और इस तरह बैठ गयी की मेरे स्ठानो के दर्शन जीवन को हो सके. वो भी बड़े प्यासी नज़रोसे मेरे स्ठानो को घूर रहा था. मुझे उसके नज़र बड़ी प्यारी लग रही थी.

    खाना खाने के बाद मेरे ससुर पान खाने चले गये. और जीवन टीवी देखते बैठ गया. हमारे गाओ मे घर कुछ बड़ा नही है. तीन रूम थे एक किचन उसके सामने हॉल था और हॉल से लगकर ही एक रूम था जिसे बेडरूम कहा सकते है. जिसमे रवि और मुझे सोना था. हॉल मे टीवी था जहा जीवन टीवी देख रहा था. मेरी सांस किचन मे बर्तन मजाने लगी और रवि रूम मे जाकर बेड पर लेट गये. मे रूम मे गयी मेने देखा की जीवन जहा बैठ हुवा था वहसे उसे हमारे रूम का सारा नज़ारा दिखता था बस बेड नही धीख पता था मतलब रवि उसे देख नही सकता था. माने दरवाज़ा खुला ही रखा और कपड़े बदलने लगी. मे चाह रही थी की जीवन मुझे कपड़े बदलते हुवे धखे. दीवार पे एक बड़ा सा आईना था जिसमे जीवन मुझे धीखा ही देता था. मेने सारी उतरी और आईना मे धेखा तो जीवन मुझे ही देख रहा था. मेने फिर अपना ब्लाउस भी उतार दिया बाद मे पेटिकोट भी उतार दिया अब मे सिर्फ़ पैंटी और ब्रा मे थी.

    मे वैसी हालत मे अपने बाल सवारने लगी ताकि ज़्यादा देर तक जीवन ऐसी मुझे धखे. जीवन की हालत बुरी थी उसके चेहरे पे सी समाज रहा था की हू पहलीबार किसी औरात को ऐसे हालत मे देख रहा होगा. उसका हाथ उसके लॅंड पर चला गया और लॅंड को सहलाने लगा. तभी मेने उसके तरफ धेखा तो थोड़ासा डर गया लेकिन मेने उसके तरफ़ देख कर थोड़ा सा मुस्करा दिया तो वो भी हल्कासा मुस्कराया. अब हू समाज चुका था की उसकी भाभी एक चालू औरात है. और मे भी वही चाहती थी की उसे लगे की मे चालू हू और वो मुझे चोदे. और मुझे भी यकीन हो गया था की अगर इसको मौका मिले तो यह मुझे चोदे बगेर नही छोड़ेंगा. उस रात हम सो गये.

    दूसरे दिन सबेरे ही मेरी पाती और ससुर कुछ कामसे तहसील के गाँव चले गये. मेरे सांस की तबीयत थोड़ी खराब थी इसलिए वो आराम कर रही थी. मे सबेरे जल्दी उठ गयी. मेने घर का सारा कम निपटा लिया. जीवन भी थोड़ा लेट उठा . शायद रात भर मेरे बड़े मे सोच सो नही पाया होगा. उसने भी नहा लिया और वो खेत पर जाने के लिए निकला तो मेने भी मेरे सांस से कहा की मे भी जीवन के साथ खेत पर जाती हू. और अपना खेत देख लेती हू. मेरी सांस ने हां कर दी. मुझे कहा खेत देखना था मुझे तो जीवन का लॅंड देखना था.

    मे जीवन के साथ मोटरसाएकल पर खेत के निकल गयी. मेने आज फिरसे वही काले कलर की ट्रांस्पेरेंट सारी और लो कट ब्लाउस पहना था. मे मोटरसाएकल पर जीवन से चिपक बैठ गयी. रास्ता खराब होने के कारण गाड़ी बार बार उछाल रही थी सो मेरे स्तन उसकी पीठ बार दब जाते थे. मेरा एक हाथ उसके जंग पर था. जब भी गाड़ी उछालती तो मे अपने हाथ से उसके लॅंड को स्पर्श करवा देती. उसका लॅंड खड़ा हो गया था. हमारा खेत गाँव से कुछ चार पाँच किलोमिटर पेट हां. हम खेत मे पहुच गये. खेत मे दूर दूर तक कोई नज़र नही आ रहा था. मुझे पता था यही सही मौका है जीवन के लिए. अब तो वो मुझे चोदे बागेर छोड़ेंगा नही और मे भी तो वही चाहती थी.



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    हेलो दोस्तो मेरा नाम पूजा है. मे पहले भी अपनी स्टोरी भेज चुकी हू आशा कराती हू की आपको मज़ा आया होगा. जिन्होने नही पढ़ी उनको बता दु. मे एक हाउसवाइफ हू. मेरी उमर 27 साल है. मेरा फिगर 34 26 32 है. मेरे पाती रवि ने कहा की चलो कुछ दिन के लिए गाँव चलते है. और हम गाँव चले गये. अब मेरे मे काफ़ी चेंज आ चुका था. मे अब काफ़ी सेक्सी बन चुकी थी. गाँव मे मेरे सास-ससुर और मेरे देवर रहते हे. मेरे देवर का नाम जीवन है. उसकी उमर लगभग 22 साल की होंगी. कलर तो काला ही था मगर खेत मे कम करने की वजह से शरीर अच्छा तगड़ा बना हुवा था. हम जब गाँव पहुचे तो घर पर सिर्फ़ मेरी सास थी. ससुर और देवर खेत मे गये हुवे थे. वैसे तो मेरे शादी को कुछ ही महीने हुवे थे सो मे किसीसे ज़्यादा परिचित नही थी. मे नयी दुल्हन होने के कारण सांस भी मेरा अच्छा ख्याल कर रही थी. उसने घर पर मुझे कुछ भी कम नही करने दिया. सो मेने उस दिन आराम ही किया.

    शाम मे ससुर और देवर भी आ गये. सब साथ मे खाना खाने बैठ गये. मेने उस दिन काले कलर की ट्रांस्पेरेंट सिल्की सारी पहनी हुवी थी. वो भी नवाल के काफ़ी नीचे. और मेरा ब्लाउस भी लो कट था. जिसमे से मेरे स्ठानो का ऊपर वाला हिस्सा साफ दिखाई देता था. मे जब जीवन को परोसने गयी तो ग़लती से मेरा सारी का पल्लू नीचे गिर गया. और मेरे स्तन उसके सामने खुले हो गये. मेने अपना पल्लू तो सावरा लेकिन देखा की जीवन मेरे स्ठानो की ही घूर रहा है. मुझे बहुत अच्छा लगा. मे पास मे ही बैठ हुवी थी. हमारी इधर उधर की बाते चल रही थी.मेने धेखा की जीवन मुझे ही घूर रहा है. मेने सोचा चलो इसके लॅंड के भी मज़े लेकर देखते है. वैसे भी घर जाने के बाद क्या पता कब एकड़ा अच्छा सा लॅंड चखने को मिले. यह अच्छा मौका है. मेने भी अपना सारी का पल्लू थोड़ा सा नीचे सरका दिया और इस तरह बैठ गयी की मेरे स्ठानो के दर्शन जीवन को हो सके. वो भी बड़े प्यासी नज़रोसे मेरे स्ठानो को घूर रहा था. मुझे उसके नज़र बड़ी प्यारी लग रही थी.

    खाना खाने के बाद मेरे ससुर पान खाने चले गये. और जीवन टीवी देखते बैठ गया. हमारे गाओ मे घर कुछ बड़ा नही है. तीन रूम थे एक किचन उसके सामने हॉल था और हॉल से लगकर ही एक रूम था जिसे बेडरूम कहा सकते है. जिसमे रवि और मुझे सोना था. हॉल मे टीवी था जहा जीवन टीवी देख रहा था. मेरी सांस किचन मे बर्तन मजाने लगी और रवि रूम मे जाकर बेड पर लेट गये. मे रूम मे गयी मेने देखा की जीवन जहा बैठ हुवा था वहसे उसे हमारे रूम का सारा नज़ारा दिखता था बस बेड नही धीख पता था मतलब रवि उसे देख नही सकता था. माने दरवाज़ा खुला ही रखा और कपड़े बदलने लगी. मे चाह रही थी की जीवन मुझे कपड़े बदलते हुवे धखे. दीवार पे एक बड़ा सा आईना था जिसमे जीवन मुझे धीखा ही देता था. मेने सारी उतरी और आईना मे धेखा तो जीवन मुझे ही देख रहा था. मेने फिर अपना ब्लाउस भी उतार दिया बाद मे पेटिकोट भी उतार दिया अब मे सिर्फ़ पैंटी और ब्रा मे थी.

    मे वैसी हालत मे अपने बाल सवारने लगी ताकि ज़्यादा देर तक जीवन ऐसी मुझे धखे. जीवन की हालत बुरी थी उसके चेहरे पे सी समाज रहा था की हू पहलीबार किसी औरात को ऐसे हालत मे देख रहा होगा. उसका हाथ उसके लॅंड पर चला गया और लॅंड को सहलाने लगा. तभी मेने उसके तरफ धेखा तो थोड़ासा डर गया लेकिन मेने उसके तरफ़ देख कर थोड़ा सा मुस्करा दिया तो वो भी हल्कासा मुस्कराया. अब हू समाज चुका था की उसकी भाभी एक चालू औरात है. और मे भी वही चाहती थी की उसे लगे की मे चालू हू और वो मुझे चोदे. और मुझे भी यकीन हो गया था की अगर इसको मौका मिले तो यह मुझे चोदे बगेर नही छोड़ेंगा. उस रात हम सो गये.

    दूसरे दिन सबेरे ही मेरी पाती और ससुर कुछ कामसे तहसील के गाँव चले गये. मेरे सांस की तबीयत थोड़ी खराब थी इसलिए वो आराम कर रही थी. मे सबेरे जल्दी उठ गयी. मेने घर का सारा कम निपटा लिया. जीवन भी थोड़ा लेट उठा . शायद रात भर मेरे बड़े मे सोच सो नही पाया होगा. उसने भी नहा लिया और वो खेत पर जाने के लिए निकला तो मेने भी मेरे सांस से कहा की मे भी जीवन के साथ खेत पर जाती हू. और अपना खेत देख लेती हू. मेरी सांस ने हां कर दी. मुझे कहा खेत देखना था मुझे तो जीवन का लॅंड देखना था.

    मे जीवन के साथ मोटरसाएकल पर खेत के निकल गयी. मेने आज फिरसे वही काले कलर की ट्रांस्पेरेंट सारी और लो कट ब्लाउस पहना था. मे मोटरसाएकल पर जीवन से चिपक बैठ गयी. रास्ता खराब होने के कारण गाड़ी बार बार उछाल रही थी सो मेरे स्तन उसकी पीठ बार दब जाते थे. मेरा एक हाथ उसके जंग पर था. जब भी गाड़ी उछालती तो मे अपने हाथ से उसके लॅंड को स्पर्श करवा देती. उसका लॅंड खड़ा हो गया था. हमारा खेत गाँव से कुछ चार पाँच किलोमिटर पेट हां. हम खेत मे पहुच गये. खेत मे दूर दूर तक कोई नज़र नही आ रहा था. मुझे पता था यही सही मौका है जीवन के लिए. अब तो वो मुझे चोदे बागेर छोड़ेंगा नही और मे भी तो वही चाहती थी.



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    हेलो दोस्तों मेरा नाम पूजा है. में पहले भी अपनी स्टोरी भेज चुकी हूँ आशा करती हूँ की आपको मजा आया होगा. जिन्होंने नहीं पढ़ी उनको बता दम. में एक हाउसवाइफ हूँ. मेरी उमर 27 साल है. मेरा फिगर 34 26 32 है. मेरे पति रवि ने कहा की चलो कुछ दिन के लिए गाँव चलते है. और हम गाँव चले गये. अब मेरे में काफी चेंज आ चुका था. में अब काफी सेक्सी बन चुकी थी. गाँव में मेरे सास-ससुर और मेरे देवर रहते हे. मेरे देवर का नाम जीवन है. उसकी उमर लगभग 22 साल की होंगी. कलर तो काला ही था मगर खेत में कम करने की वजह से शरीर अच्छा तगड़ा बना हुवा था. हम जब गाँव पहुंचे तो घर पर सिर्फ़ मेरी सास थी. ससुर और देवर खेत में गये हुवे थे. वैसे तो मेरे शादी को कुछ ही महीने हुवे थे सो में किसीसे ज्यादा परिचित नहीं थी. में नयी दुल्हन होने के कारण सांस भी मेरा अच्छा ख्याल कर रही थी. उसने घर पर मुझे कुछ भी कम नहीं करने दिया. सो मैंने उस दिन आराम ही किया.

    शाम में ससुर और देवर भी आ गये. सब साथ में खाना खाने बैठ गये. मैंने उस दिन काले कलर की ट्रांस्पेरेंट सिल्की सारी पहनी हुवी थी. वो भी नवल के काफी नीचे. और मेरा ब्लाउज भी लो कट था. जिसमें से मेरे स्तानो का ऊपर वाला हिस्सा साफ दिखाई देता था. में जब जीवन को परोसने गयी तो गलती से मेरा सारी का पल्लू नीचे गिर गया. और मेरे स्तन उसके सामने खुले हो गये. मैंने अपना पल्लू तो सावरा लेकिन देखा की जीवन मेरे स्तानो की ही घूर रहा है. मुझे बहुत अच्छा लगा. में पास में ही बैठ हुवी थी. हमारी इधर उधर की बातें चल रही थी.मैंने धेखा की जीवन मुझे ही घूर रहा है. मैंने सोचा चलो इसकेके भी मजे लेकर देखते है. वैसे भी घर जाने के बाद क्या पता कब एकड़ा अच्छा सा लंड चखने को मिले. यह अच्छा मौका है. मैंने भी अपना सारी का पल्लू थोड़ा सा नीचे सरका दिया और इस तरह बैठ गयी की मेरे स्तानो के दर्शन जीवन को हो सके. वो भी बारे प्यासी नज़रोसे मेरे स्तानो को घूर रहा था. मुझे उसके नज़र बड़ी प्यारी लग रही थी.

    खाना खाने के बाद मेरे ससुर पान खाने चले गये. और जीवन टीवी देखते बैठ गया. हमारे गाओ में घर कुछ बड़ा नहीं है. तीन रूम थे एक किचन उसके सामने हॉल था और हॉल से लगकर ही एक रूम था जिसे बेडरूम कहा सकते है. जिसमें रवि और मुझे सोना था. हॉल में टीवी था जहां जीवन टीवी देख रहा था. मेरी सांस किचन में बर्तन मजाने लगी और रवि रूम में जाकर बेड पर लेट गये. में रूम में गयी मैंने देखा की जीवन जहां बैठ हुवा था वहसे उसे हमारे रूम का सारा नज़ारा दिखता था बस बेड नहीं धीख पता था मतलब रवि उसे देख नहीं सकता था. मैंने दरवाजा खुला ही रखा और कपड़े बदलने लगी. में चाह रही थी की जीवन मुझे कपड़े बदलते हुवे धक्के. दीवार पे एक बड़ा सा आइना था जिसमें जीवन मुझे धीखा ही देता था. मैंने सारी उतरी और आइना में धेखा तो जीवन मुझे ही देख रहा था. मैंने फिर अपना ब्लाउज भी उतार दिया बाद में पेटीकोट भी उतार दिया अब में सिर्फ़ पैंटी और ब्रा में थी.

    में वैसी हालत में अपने बाल संवारने लगी ताकि ज्यादा देर तक जीवन ऐसी मुझे धक्के. जीवन की हालत बुरी थी उसके चेहरे पे सी समाज रहा था की हूँ पहलीबार किसी औरत को ऐसे हालत में देख रहा होगा. उसका हाथ उसके लंड पर चला गया और लंड को सहलाने लगा. तभी मैंने उसके तरफ धेखा तो थोड़ा सा डर गया लेकिन मैंने उसके तरफ देख कर थोड़ा सा मुस्करा दिया तो वो भी हल्कासा मुस्कराया. अब हूँ समाज चुका था की उसकीएक चालू औरत है. और में भी वही चाहती थी की उसे लगे की में चालू हूँ और वो मुझे चोदे. और मुझे भी यकीन हो गया था की अगर इसको मौका मिले तो यह मुझे चोदे बगैर नहीं छोड़ेंगा. उस रात हम सो गये.

    दूसरे दिन सबेरे ही मेरी पति और ससुर कुछ काम से तहसील के गाँव चले गये. मेरे सांस की तबीयत थोड़ी खराब थी इसलिए वो आराम कर रही थी. में सबेरे जल्दी उठ गयी. मैंने घर का सारा कम निपटा लिया. जीवन भी थोड़ा लेट उठा . शायद रात भर मेरे बारे में सोच सो नहीं पाया होगा. उसने भी नहा लिया और वो खेत पर जाने के लिए निकला तो मैंने भी मेरे सांस से कहा की में भी जीवन के साथ खेत पर जाती हूँ. और अपना खेत देख लेती हूँ. मेरी सांस ने हां कर दी. मुझे कहा खेत देखना था मुझे तो जीवन का लंड देखना था.

    में जीवन के साथ मोटरसाइकल पर खेत के निकल गयी. मैंने आज फिरसे वही काले कलर की ट्रांस्पेरेंट सारी और लो कट ब्लाउज पहना था. में मोटरसाइकल पर जीवन से चिपक बैठ गयी. रास्ता खराब होने के कारण गाड़ी बार बार उछाल रही थी सो मेरे स्तन उसकी पीठ बार दब जाते थे. मेरा एक हाथ उसके जंग पर था. जब भी गाड़ी उछालती तो में अपने हाथ से उसके लंड को स्पर्श करवा देती. उसका लंड खड़ा हो गया था. हमारा खेत गाँव से कुछ चार पाँच किलोमीटर पेट हां. हम खेत में पहुंच गये. खेत में दूर दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा था. मुझे पता था यही सही मौका है जीवन के लिए. अब तो वो मुझे चोदे बगैर छोड़ेंगा नहीं और में भी तो वही चाहती थी.

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