अंजलि ने सुप्रिया को चुदवाया

Discussion in 'Hindi Sex Stories - हिंदी सेक्स कहानियाँ' started by SexStories, Sep 13, 2017.

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    हेलो दोस्तों, Antarvasna मैं आपका दोस्त विवेक फिर से आपके लिए हाजिर हूं और इस बार मैं एक नई कहानी के साथ आया हूं जो कि पिछली कहानी से ही संबंध रखती है. आप के मेरी पिछली कहानियों के सुझाव मिले जिसे पढ़कर खूब अच्छा लगा अब मेरी पिछली कहानी के आगे ही मेरी यह कहानी है, इसलिए पढ़िए और मजा लीजिए.

    चलो अब कहानी शुरू करते हैं. दोस्तों मेरी पिछली कहानी में मैंने कैसे अंजलि के साथ सुप्रिया की शर्त रखी और अंजलि की चूत फाड़ डाली.

    दोस्तों अब मैं आपको आगे की मस्त कहानी बताता हूं क्योंकि मैं इसका बहुत लंबे समय से इंतजार कर रहा था. दोस्तों आपने यह कहावत तो सुनी होगी कि अगर मन से किसी चीज की चाहत रखो तो वह जरूर मिल जाती है.

    तो कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ, मेरे चाचा जी जहां काम करते थे वहां पर किसी एंप्लॉय के बेटे की शादी थी और हमारे घर पर शादी का इंविटेशन आया हुआ था, मेरे चाचा जी की उनके साथ बहुत अच्छी दोस्ती थी इसलिए मेरे चाचा जी ने अपनी तो पैकिंग कर ही ली थी, और साथ में उनकी बीवी याने मेरी चाची रागिनी भी चलने को तैयार थे.

    वैसे चाचा जी ने मुझे भी साथ चलने को कहा था पर मैंने मना कर दिया था, अब घर पर सिर्फ मैं और सुप्रिया और अंजलि ही रह गए थे, और हमें करीब ५ दिन अकेले ही रहना था.

    अब चाचा जी के जाने के बाद हम अब घर पर अकेले हो गए थे, और तभी मैंने बातों बातों में अंजली को अपनी शर्त के बारे में याद दिला दिया.

    अंजली - अरे रुको भी, इतनी भी जल्दी क्या है?

    अब मैंने उसकी बात एक नजरिए से तो मान ली और तभी अंजलि ने मुझे एक प्लान बताया और वहां से चली गई, अब तो प्लान के मुताबिक मेने काम करना शुरू कर दिया. अब रात भी हो गई थी और मैंने अब अंजलि के घर पर २-३ पत्थर फेंके जिसे सुन कर दोनों डर गई, पर अंजलि तो यह सब जानती थी, इसलिए डरने का नाटक करने लगी.

    अंजलि - जो भी है कमरे में आ जाओ.

    अब मैं उनकी यह बात सुनकर कर पहले तो ना करी, पर उनके ज्यादा जोर देने पर घर के अंदर जाकर उसके कमरे में आकर खड़ा हो गया. तो वह दोनों बोलने लगी तुम यहीं सो जाओ.

    अब अंजलि और सुप्रिया दोनों एक ही बेड पर लेटी हुई थी और मैं उन्हीं के कमरे में चारपाई पर लेटा हुआ था, पर मुझे तो नींद कहां से आनी थी? क्योंकि मेरे दिमाग में तो सुप्रिया को चोदने का प्लान बना हुआ था, और उन दोनों बहनों की नींद टूट चुकी थी. इसलिए वह भी अब सो नहीं पा रही थी, जब मैंने उन्हें भी जागते देखा तो टीवी ऑन कर दिया और चैनल चेंज करने लगा.

    अंजली - में तो फैशन चैनल देखूंगी.

    अब मैंने अंजलि की बात मानी और फैशन चेनल लगा दिया, जहां पर लड़कियों आधी नंगी स्टेज पर कैटवॉक कर रही थी, जिसे देख कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

    मैंने सुप्रिया की तरफ देखा तो मुझे ऐसा लगा वह टीवी कम और मुझे ज्यादा देख रही थी, मैं समझ गया था की सुप्रिया को चोदने में मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.

    मैंने अंजलि को पानी देने के लिए कहा और जब उसने मुझे पानी का गिलास पकडाया तो उसने जानबूझकर पानी मेरे कंबल पर गिरा दिया, जोकि मैं पहले से ही जानता था कि अंजलि की यही प्लानिंग थी, अब मैंने उसे नए कंबल को देने को कहा क्योंकि अब हम टीवी देख कर बोर हो रहे थे, और अब हमें नींद भी आ रही थी.

    अंजलि ने मुझे बेड़ पर ही सोने को कहा पर मैंने पहले मना कर दिया, तो सुप्रिया बोली अरे यहीं आ जाओ.

    मैं तो पहले से ही चाहता था कि मैं सुप्रिया के साथ सोऊ, इसलिए मैंने भी अब मना नहीं किया और साइड में लेट गया, बीच में अंजलि और उसकी साइड में सुप्रिया लेटी हुई थी और हम सो गए.

    रात को बीच में अंजलि वाशरुम के लिए रुठी तो मेरी भी आंख खुल गई और जब वह आई तो उसने गर्मी का बहाना लगाते हुए सुप्रिया को बीच में कर दिया और खुद उसी जगह लेट गई.

    अब हम दोनों क्यों नींद तो खराब हो चुकी थी और अब तो मेरे साथ भी सुप्रिया लेटी हुई थी, इसलिए मैंने थोड़ी हिम्मत करते हुए अपना हाथ उसकी जांघों पर रख दिया और मजे लेने लगा.

    सुप्रिया भी सो रही थी शायद सोने का नाटक ही कर रही थी, इसलिए उसने अब अपनी टांगे खोल दी, जीससे मेरा हाथ उसकी चूत पर आसानी से लग रहा था और मैं बड़े मजे से उसकी चूत को ऊपर से ही रगड़ रहा था, मुझे पता था कि सुप्रिया जाग रही है इसलिए कंफर्म करने के लिए मैंने हाथ उसकी चूत पर से हाथ उठाया तो जैसे ही अपने मेंने अपना हाथ उठाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और फिर से अपनी चूत पर रख दिया.

    सुप्रिया - करते रहो ना. मजा आ रहा है.

    मैं उसकी बात सुनकर बहुत खुश था, क्योंकि मैं तो यही चाहता था. क्योंकि मुझे बिना कोई कष्ट किये मिल रहा था, और फिर मैंने उसे कुछ नहीं कहा और उसकी चूत को अपनि उंगलियों से रगड़ने लगा.

    सुप्रिया ने भी बस अंजलि के सोने का नाटक का इंतजार किया और जैसे ही अंजलि सो गई उसने मेरे लंड को ऊपर से ही अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरे जिस्म से चिपक कर लेट गई.

    अब मैंने भी उसे अपनी बाहों में जोर से जकड़ा और उसके मस्त छोटे छोटे बूब्स को हाथों में लेकर दबाने लगा, सुप्रिया को मेरे ऐसा करने से बहुत मजा आ रहा था, इसलिए अब उसके मुंह से सिसकियां निकलने लगी.

    मैं तो उसके बूब्स को दबा रहा था, तभी सुप्रिया के मुह से आह्ह ईई औऊ की आवाजे निकली जिससे अंजलि की आंख खुल गई और वह बोली क्या हुआ?

    अंजलि जानती थी की पहल हो चुकी है इसलिए वह फिर से बोली तुम कोई गेम तो नहीं खेल रहे?

    यह कहते हुए वह हमारे पास आ गई और कहने लगी मैं भी खेलूंगी.

    अब मैंने उसकी बात मानी और कहा ठीक है, पर बारी बारी. अब मैंने सुप्रिया के कपड़े उतार दिए, और अपने सामने सिर्फ ब्रा पेंटि में कर दिया, उधर अंजलि ने मेरे पजामे को उतार कर लंड भी बहार निकाल लिया जोकि पहले से ही खड़ा हुआ था.

    अब तो मैंने सुप्रिया की ब्रा भी अलग कर दी और उसके बूब्स को आजाद कर दिया. सुप्रिया का जीस्म जैसे ही मेरी आंखो के सामने आया तो मैं तो उसको बस देखता ही रह गया और अंजलि उसकी पैंटी में हाथ डालकर उसके चूतड़ों को दबाने लगी और मैंने भी कुछ ऐसा ही किया और उसके बूब्स को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा.

    मैं पहले एक बूब को मुंह में डालकर चूसता, तो कभी दूसरा चूसता. मेरे ऐसा करने से सुप्रिया सिसकियां भरने लगी. और मैं अब उसके जिस्म को चूमते हुए उसकी चूत पर जा पहुंचा. तो मैंने देखा कि सुप्रिया की पैंटी तो पहले से ही गीली पड़ी है, जिसे अंजलि ने उतार दिया और अब सुप्रिया मेरे सामने बिल्कुल नंगी हो चुकी थी.

    अब मैंने जैसे ही उसकी चूत को अपने आंखों के सामने देखा तो मैं पागल हो गया, क्योंकि सुप्रिया की चूत एकदम साफ और गुलाबी रंग की थी. जिसे देखकर मैं कुछ नहीं कर पाया और तभी अंजलि ने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया, जिसके एहसास से में बहुत खुश हुआ और मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मैं कहीं स्वर्ग में तो नहीं आ गया हूं.

    अंजलि मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसती रही और मैं सुप्रिया को चाटता रहा, फिर जब अंजलि ने लंड को मुंह से निकाला तो उसे सुप्रिया ने पकड़ लिया और अपनी चूत पर रखकर अंदर लेने की कोशिश करने लगी.

    मैं - सुप्रिया मेरी जान बिस्तर पर लेट जाओ.

    अभी मेरी बात सुनकर सुप्रिया बिस्तर पर लेट गई और मैंने उसकी कमर को बेड के किनारे पर कर दिया और उसके चूतड़ों के नीचे एक पिलो रख दिया उसकी चूत उठ गई और साफ दिखने लगी.

    अब मैंने अंजलि को इशारा करके उसके होंठों को चूसने को कहा, और मैंने देखा कि उसकी चूत में से पानी निकल रहा था, इसलिए अंजलि को इशारा करके उसके बूब्स को मसलने के लिए भी कह दिया.

    अब दोनों बहने अपने मैं मस्त थी इसी बीच मेंने मौके का फायदा उठाते हुए उसकी चूत में एक जोरदार धक्का लगा दिया, जिससे मेरा लंड तो पूरा उसकी चूत में चला गया, और सुप्रिया के मुंह से जोरदार चीख निकल गई, जोकि अंजलि के मुह तक ही सिमट कर रह गई.

    मैं - चुदाई शुरू करूं?

    सुप्रिया - अभी भी बाकी है क्या?

    अंजलि - अब तो मशीन चलनी है रह गई है बस.

    अब मैं अंजलि की बात सुनकर लंड को ऊपर नीचे करने लगा और सुप्रिया के मुह से भी आवाज़ निकलने लगी.

    मैं - मजा आ रहा है?

    सुप्रिया भी अहह ओह्ह हहह हप झाह्ह करती हुई मजे से इशारा देने लगी कि उसे भी खूब मजा आ रहा था और मैं ऐसे ही करता रहूं.

    अब मैंने उसकी बात सुनकर चूत में गोल गोल लंड को घुमाना शुरु कर दिया जिससे उसकी आवाजे पूरे कमरे में गूंज रही थी, और करीब १५ मिनट बाद ही उसकी चूत से पानी निकल गया और मेरा लंड उसके पानी में पूरा भीग गया.

    अब मैंने अपनी असली चुदाई को शुरू किया और जोर जोर से ऊपर नीचे करने लगा पर मेरे लंड ने तो एक जैसे पानी ना निकालने की जिद कर रखी थी, इसलिए मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और अंजलि को देख कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा, और करीब ५ मिनट बाद मेरे लंड ने भी अपना सारा पानी सुप्रिया की चूत में निकाल दिया और सुप्रिया ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया.

    हम दोनों बहुत थक चुके थे और लेटे हुए थे, तभी अंजलि ने मेरे सोए हुए लंड को हाथ में पकड़ कर अपने आप को चुदाने के लिए ऑफर किया, पर उसने मेरी हालत भी देख ली थी इसलिए सुबह होने से पहले तक चोदने के लिए कहा.

    मे उसकी बात सुनकर हंस पड़ा और सुप्रिया को अपनी बाहों में जकड़ लिया.

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